देश आज़ाद, पर क्या ‘मैं’ आज़ाद हूँ
देश आज़ाद, पर क्या ‘मैं’ आज़ाद हूँ 

Devendra Uniyal
आज स्वतंत्रता दिवस है। 1947 में हमारा देश आज़ाद हुआ और हर साल हम 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। देश तो आज़ाद हुआ, पर हम अपने से सवाल पूछें कि क्या ‘मैं’ आज़ाद हुआ? मनुष्य को ही आज़ाद होना है, यह मनुष्य जन्म आज़ाद होने के लिए ही मिला है। देश तो आज़ाद होते हैं और फिर से मिट जाते हैं, पर तुम इंसान हो; अगर तुम आज़ाद नहीं हुए तो फिर तुम्हारे लिए इस संसार में ही नहीं, परलोक में भी सज़ाओं का दौर शुरू हो जाता है। मालूम है किसलिए? क्योंकि तुम आज़ाद नहीं हुए। इसलिए हर त्यौहार, हर उत्सव तुम्हें कोई न कोई संदेश देता है। इस धरती पर हर मनुष्य को आज़ादी के संघर्ष से निकलना ही होगा। देश तो आज़ाद हुआ पर तुम अभी भी गुलाम हो; एक आज़ाद देश में तुम अभी भी गुलाम हो,और गुलाम को ही दुख,अशांति, पीड़ा और चिंता होती है। इसलिए यह आज़ादी अभी अपूर्ण है। पूर्ण आज़ादी उसी दिन होगी जिस दिन तुम अपने को इस मृत्यु लोक से आज़ाद कर दोगे, यानी इन दुखों और सुखों के घेरे को तोड़ दोगे। मुक्त! आज़ाद देश में अगर तुम गुलाम होकर ही मरे, तो सोचो फिर से चौरासी लाख योनियों की सज़ाओं से गुज़रना होगा। आज हम अंदर से जानें और देखें कि कहीं ना कहीं दुख आज भी पीछा कर रहा है। पहले अंग्रेजों का दुख था,अब अपनों का दुख है। देश तो आज़ाद हो गया पर मैं आज़ाद नहीं हुआ। किससे? अपने दुखों से। ये मनुष्य जन्म जो मिला है, उसके बारे में जितने भी लोग इस संसार में आज़ाद हुए उन सभी आज़ाद हुए लोगों ने यही कहा कि यदि तुमने अपनी आंतरिक आज़ादी को न पाया, तो ये जीवन व्यर्थ हो जायेगा और मौत के समय पछताना पड़ेगा। तुम इस आज़ाद देश में आज भी दुखों के गुलाम हो। कितने लोगों ने आज़ादी पाई, परंतु तुम उन्हें पहचान नहीं पाए, वो लोग जो आज़ाद हुए, जिनको हम आज भगवान कहते हैं, भक्त कहते हैं; गौतम बुद्ध, महावीर, जीसस, मोहम्मद, कबीर, फरीद ,रामकृष्ण परमहंस, साईं बाबा, मीराबाई, सहजो बाई, लल्ला बाई, लाओत्से और सुकरात। ये सभी लोग इस धरती पर आकर आज़ाद हो गए, मुक्त हो गए! मुक्ति, इस जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति! भारत में ऐसे मुक्त लोगों का, यानी आज़ाद लोगों का अंबार है, इसलिए इसे विश्व गुरु कहा गया। पर आज उसी भारत देश में, जहाँ इतने मुक्त पुरुष हुए, तुम गुलामी में जी रहे हो। अब समय आ गया है कि जीवन की उस शांति को खोजना है। इसलिए जब-जब देश की आज़ादी का दिन आता है, तब-तब तुम अपनी आज़ादी का सवाल उठाओ। ये नहीं कि छुट्टी का दिन है तो एंजॉय करेंगे, आज पतंगें उड़ाएँगे और जलेबियाँ खाएँगे, खाते ही रहोगे क्या? देश अभी पूर्ण रूप से आज़ाद नहीं हुआ है, क्योंकि देश पूर्ण आज़ाद तभी होगा जब वह विश्व गुरु बनेगा। इसलिए थोड़ा सा जागो! और आज के दिन सच्ची आज़ादी का संकल्प लो, ताकि ये आज़ाद देश फिर से विश्व गुरु बन सके। मुक्ति और आज़ाद होने का मतलब है, अहंकार से मुक्ति, ‘मैं-मेरा’ से मुक्ति। अगर तुम भगवान श्रीकृष्ण के कहे अनुसार निश्चयात्मक बुद्धि और दृढ़ निश्चय वाला होकर कर्म करोगे, तो अगले बरस देश की आज़ादी के साथ तुम भी मुक्त हो जाओगे। फिर संसार तुम्हारी ओर देखेगा, और फिर से ये देश विश्व गुरु कहलाएगा। जागो, समय आ गया है! जहाँ तुम हो, वहीं से पूरी दुनिया को आइना दिखा सकते हो। पूरा विश्व एक ब्लैक होल की तरफ जा रहा है। तुम जागोगे, तो तुम्हारे पीछे सारे नौजवान चलेंगे, और विश्व को संदेश देंगे। संसार उन आध्यात्मिक रूप से आज़ाद महापुरुषों का सम्मान करेगा, और वही सच्चा विकास है। बाहर का विकास हो तो अच्छी बात है, पर अगर अंदर का विकास नहीं हुआ तो समझो सब व्यर्थ हो गया। क्या फायदा अगर हमारी खुशियाँ ही चली गईं? आज एक घर के अंदर चार लोग बैठकर इकट्ठे खाना नहीं खाते; दुखी हैं, डिप्रेशन में जा रहे हैं तो हमने क्या पाया? बाहर का विकास हुआ, पर अंदर का विकास क्यों नहीं हुआ? क्योंकि हम जान ही नहीं पाए कि मैं आज़ाद नहीं हूँ। देश आज़ाद हुआ, पर मैं अभी आज़ाद नहीं हूँ। मुझे आज़ाद होना है ताकि जीवन का आनंद आ सके और सच्चिदानंद तुम्हारे स्वरूप में प्रकट हो सके। तभी तुम्हारा जन्म सफल होगा!