165 साल पहले हमने जाना वैलेंटाइन डे का नाम l मसूरी के एक अंग्रेज ने अपनी बहन को लिखे खत में किया था वैलेंटाइन डे का जिक्र
165 साल पहले हमने जाना वैलेंटाइन डे का नाम l
मसूरी के एक अंग्रेज ने अपनी बहन को लिखे खत में किया था वैलेंटाइन डे का जिक्र
मसूरी
देवेंद्र उनियाल
दुनिया में वैलेंटाइन डे का इतिहास काफी पुराना है लेकिन भारत में 165 साल पहले हमने सुना वैलेंटाइन डे का नाम यह जानकर आश्चर्य होगा कि मसूरी के एक अंग्रेज ने अपनी बहन को लिखे खत में वैलेंटाइंस डे का जिक्र किया था वैलेंटाइन डे के उल्लेख वाला भारत में यह पहला पत्र था 182627 के आसपास मसूरी और लंदन के बीच पहली बार डाक सेवा शुरू हुई थी तो विश्व के कुछ चुनिंदा शहरों में मसूरी का भी नाम जुड़ गया जहां सबसे आरंभिक दिनों में पोस्टल सर्विस अस्तित्व में आई एक अंग्रेज ने पहली बार मसूरी से वैलेंटाइन के दिन पत्र भेजा था जिसमें उसने खुलकर अपनी जीवन संगिनी के साथ प्रेम के सुखद एहसास का अपनी बहन से जिगर किया था 1828 में इंग्लैंड में जन्मे माउघर
मार्क थे फकड़ो सा जीवन जी रहे मऊघर मार्क को एलिजाबेथ लूइन से प्यार हो गया एलिजाबेथ के पिता सरधना की बेगम समरू की सेना में कैप्टन थे मॉक ने अलीजावेथ से जल्द शादी भी कर ली माउघर ने
14 फरवरी 1843 को इंग्लैंड में मौजूद अपनी बहन मारग्रेट मार्क को एक खूबसूरत सा पत्र लिखा मॉक ने लिखा कि आज वैलेंटाइन डे के दिन में यह पत्र लिख रहा हूं तुम्हें यह बताने के लिए कि मैं बहुत खुश हूं एलिजाबेथ जब से मेरी जीवन में आई है तब से मैं एक सव्य जीवन बिता रहा हूं पहले मैं मसूरी में अकेला था मैं बेवजह दुखी रहता था दिन भर हवाई कीले बनाता था लेकिन अब जब मैं घर लौटता हूं तोलूइन
मुस्कराकर मेरा स्वागत करती है वह आग जलती है. खाना बनाकर अपने हाथों से खिलाता है मुझे किताब भी पढ़ कर सुनाती हैl
इस पत्र में मॉक और लूइन के बीच बीत रहे प्यार के पत्रों का अच्छा खासा जिगर है लगभग डेढ़ सौ साल बाद मार्क के ही किसी दूर के रिश्तेदार एंड्रयू मॉर्गन ने द इंडियन लेटर्स में इस विशेष पत्र का जिक्र किया है l
इतिहासकार गोपाल भारद्वाज का दावा है कि वैलेंटाइन के उल्लेख वाला भारत से भेजा गया यह पहला पत्र था क्योंकि भारत में डाक सेवा अपनी शौसव कला में थीl
मॉक की 32 वर्षीय अल्प आयु में 1849 को मृत्यु हो गई उनकी कब्र आज भी सेंट जॉन्स चर्च मेरठ में है.
संपादक: देव उनियाल
