October 1, 2026

बेरोजगारी से जूझ रहे गोल्फकार्ट संचालकों ने शुरू की 72 घंटे की भूख हड़ताल

बेरोजगारी से जूझ रहे गोल्फकार्ट संचालकों ने शुरू की 72 घंटे की भूख हड़ताल
मसूरी।
Devendra Uniyal
गत छह माह से नगर पालिका द्वारा गोल्फकार्ट संचालन बंद किए जाने से भुखमरी का दंश झेल रहे गोल्फकार्ट संचालकों ने सुनवाई न होने पर नगर पालिका व प्रशासन के विरोध में शहीद स्थल पर तीन दिवसीय 72 घंटे की भूख हड़ताल शुरू कर दी।
मजदूर संघ के बैनर तले शुरू हुई हड़ताल में संघ अध्यक्ष रणजीत सिंह चौहान, वीरेंद्र सिंह डुंगरियाल और राजेश प्रसाद भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वहीं उनके समर्थन में विजय सिंगवान, शंकर मियां, लख्खी लाल, दाता राम आदि धरने पर बैठे हैं।
इस दौरान संचालकों ने एसडीएम को ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि जब तक गोल्फकार्ट संचालकों की समस्या का समाधान नहीं किया जाता, तब तक तीन दिन हड़ताल जारी रहेगी। इसके बाद भी समाधान न होने पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की जाएगी।
ज्ञापन में बताया गया कि वर्ष 2025 में पालिका प्रशासन ने प्रस्ताव पास कर 14 गोल्फकार्ट आवंटित की थीं, लेकिन आज तक उनका पंजीकरण और इंश्योरेंस नहीं किया गया। मांग की गई कि शीघ्र पंजीकरण व इंश्योरेंस कर बेरोजगार हो चुके संचालकों को रोजगार दिया जाए। साथ ही वर्ष 2024-25 में संपूर्ण साइकिल रिक्शा श्रमिकों के लिए बनी पुनर्वास योजना को शीघ्र अमल में लाया जाए और उसकी समीक्षा की जाए ताकि सभी को योजना का लाभ मिल सके।
मजदूर संघ अध्यक्ष रणजीत सिंह चौहान ने कहा कि पालिका प्रशासन और नगर प्रशासन की मजदूर विरोधी नीति के कारण भूख हड़ताल पर बैठना पड़ रहा है। रिक्शा पुनर्वास नीति के तहत आवंटित गोल्फकार्ट का संचालन पूर्व की भांति किया जाए, उनका पंजीकरण व इंश्योरेंस किया जाए और शेष बचे 107 रिक्शा श्रमिकों का पुनर्वास किया जाए।
उन्होंने मांग की कि भारत सरकार के उपक्रम सीआरसी फंड से रिलीज 3 करोड़ 36 लाख रुपये की योजना को मजदूर हितों में उतारा जाए, ताकि रिक्शा श्रमिक वर्तमान तकनीक का लाभ ले सकें और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। साथ ही बेकरी हिल कार पार्किंग पूर्व की भांति हाथ रिक्शा उन्मूलन के तहत मजदूर संघ को दी जाए।
उन्होंने कहा कि वह लगातार एसडीएम, पालिका प्रशासन और जिलाधिकारी के पास गए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। छह माह से बेरोजगार हो चुके गोल्फकार्ट श्रमिक अब परिवार का पोषण करने, किराया देने व बच्चों की फीस देने में भी असमर्थ हो गए हैं, जबकि गोल्फकार्ट से होने वाली आय पालिका को दी गई थी।