February 3, 2026

पद्मश्री से सम्मानित ह्यूग गैंट्जर का 95 साल की उम्र मे देहांत

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पद्मश्री से सम्मानित ह्यूग गैंट्जर का 95 साल की उम्र मे देहांत
मसूरी l
Devendra Uniyal
उत्तराखण्ड के मसूरी निवासी ह्यूग गैंट्जर का 95 साल की उम्र मे देहांत हो गया है। पद्मश्री से सम्मानित ह्यूग गैंट्ज़र उत्तराखंड के प्रसिद्ध यात्रा वृतांत लेखक हैं। वह भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी थे और कमांडर के पद से सेवानिवृत्त हुए थेl उनके निधन से मसूरी में शोक की लहर छा गयी व लोगों ने उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया व कहा कि मसूरी ने एक ऐसे साहित्यकार को खो दिया जिन्होंने अपने लेखन से पूरे देश ही नहीं विदेशों में भी अपने शहर का नाम रौशन किया। भारत सरकार ने उनकी ट्रेवल साहित्य में योगदान पर पदमश्री सम्मान से सम्मानित किया।
भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त होने के उपरांत उन्होंने और उनकी पत्नी कोलीन गैंट्जर ने भारतीय मोज़ेक के आकर्षणों की खोज करने का निर्णय लिया। 9 जनवरी, 1931 को पटना में जन्में गैंट्ज़र ने हैम्पटन कोर्ट स्कूल, सेंट जॉर्ज कॉलेज मसूरी, सेंट जोसेफ स्कूल नैनीताल, सेंट जेवियर्स महाविद्यालय, कलकत्ता और बम्बई में के. सी. विधि महाविद्यालय से अपनी शिक्षा पूरी की।
नेवी में कमांडर रहे ह्यूग गैंटज़र रिटायरमेंट के बाद, अपनी धर्म पत्नी के साथ मसूरी में ही रहे व नौ सेना के अपने अनुभवों को साहित्य जगत में उतारा व अपनी पत्नी कोलीन गैंटजर के साथ ट्रैवल राइटर बन गए और साथ मिलकर उन्होंने पांच दशकों से ज़्यादा समय तक ट्रैवल राइटिंग का काम किया। भारत की अलग-अलग विरासत और छिपे हुए रत्नों को डॉक्यूमेंट करने के लिए ह्यूग गैंटरज और कोलीन गैंटजर के समर्पण को उनकी 30 से ज़्यादा किताबों, हज़ारों लेखों और दूरदर्शन पर प्रसारित 52 डॉक्यूमेंट्री में देखा जा सकता है। उनके निधन पर अंग्रेजी के लेखक,  साहित्यकार व इतिहासकार गणेश शैली ने उन्हें याद करते हुए कहा, एक और मशहूर लेखक के चले जाने का बहुत दुख है, जो मसूरी को अपना ’घर’ कहते थे। हम अक्सर फोन पर बात करते थे और शहर में क्या हो रहा है, इसकी जानकारी एक-दूसरे को देते रहते थे। उन्होंने आगे कहा, गैंटज़र परिवार के जाने से मसूरी गरीब हो गया है, जो सामाजिक और साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय थे। जबकि उनकी पत्नी कोलीन गैंटज़र का निधन तीन माह पूर्व 6 नवंबर, 2024 को 90 साल की उम्र में हुआ था, इस जोड़ी को पिछले गणतंत्र दिवस पर ट्रैवल जर्नलिज़्म में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया था, जिसे ह्यूग गैंटज़र ने मसूरी में अपने पारिवारिक घर ओक ब्रूक में उत्तराखंड सरकार के सचिव के हाथो लिया था। गैंज़र हमारे बचपन का हिस्सा थे। दिवाली और क्रिसमस पर तोहफे भेजना एक परंपरा थी जो शायद ही कभी छूटती थी, इस साल भी अंकल ह्यूग ने क्रिसमस केक भेजने की परंपरा को ज़िंदा रखा, जबकि हमने दिवाली की मिठाइयाँ भेजीं क्योंकि उन्हें मीठा बहुत पसंद था और उन्हें हमारी मिठाइयाँ खाना बहुत अच्छा लगता था। मैंने उनसे आखिरी बार पिछले सोमवार को बात की थी, मिलने और कुछ मिठाइयाँ और नमकीन लाने का प्लान बनाया था। उनसे बात करना हमेशा खुशी की बात होती थी। वह हमेशा अच्छे मूड में रहते थे l
बताया कि बुधवार को सुबह कैमल्स बैक कब्रिस्तान में उनको दफनाया जाएगा l ह्यूग गैंटज़र का योगदान मसूरी को बचाने के लिए भी हमेशा याद किया जायेगा। उन्होंने जब मसूरी में चूने की खदाने खनन कर इस प्राकृतिक सौदर्य से भरपूर मसूरी को नुकसान पहुंचाया जा रहा था तब देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मसूरी में खदान पर रोक लगायी व मसूरी को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में मानेटरिंग कमेटी बनायी जिसके वह सदस्य रहे व मसूरी में हो रहे खनन व अवैध निर्माण को रोकने में अपना विशेष योगदान दिया। उनके चले जाने से पूरे मसूरी में शोक की लहर छा गयी है। उनके निधन पर सभी राजनैतिक दलों, सामाजिक संगठनों ने गहरा दुःख व्यक्त कर श्रद्धांजलि अर्पित की है।
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संपादक: देव उनियाल

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