मसूरी कैमल बैक के जंगलों में दिखा राष्ट्रीय पक्षी मोर, जलवायु परिवर्तन मानी जा रही वजह. 6000 फीट की ऊँचाई पर भी अनुकूल माहौल, बाज.देवदार के जंगल बने नया ठिकाना
मसूरी कैमल बैक के जंगलों में दिखा राष्ट्रीय पक्षी मोर, जलवायु परिवर्तन मानी जा रही वजह.
6000 फीट की ऊँचाई पर भी अनुकूल माहौल, बाज.देवदार के जंगल बने नया ठिकाना


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Devendra Uniyal
पहाड़ों की रानी मसूरी के कैमल बैक के जंगल में राष्ट्रीय पक्षी मोर दिखाई दीया l सामान्य रूप से निचले और मैदानी इलाकों में पाए जाने वाले मोर अब मसूरी जैसे ऊँचे पहाड़ी क्षेत्रों में भी देखे जा रहे हैं। पक्षी विशेषज्ञ और इतिहासकार इसे जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान का असर मान रहे हैं।
क्यों आ रहे हैं मोर पहाड़ पर
इस बारे में इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने बताया कि उनके परिवार को यहां पर रहते हुए 100 साल के करीब हो गई है लेकिन पहली बार कैमल बैक के जंगलों में राष्ट्रीय पक्षी मोर देखा गया बताया कि पिछले कुछ सालों में मसूरी समेत उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों का औसत तापमान बढ़ा है। पहले जो ठंड मोरों के लिए प्रतिकूल थी, अब 6000 फीट से अधिक की ऊँचाई पर भी उन्हें अनुकूल वातावरण मिल रहा है।
बताया कि मसूरी के घने बाज .देवदार के जंगल मोरों को छिपने के लिए सुरक्षित जगह दे रहे हैं। यहाँ कीड़े-मकोड़े, बीज, छोटे सरीसृप और अनाज आसानी से मिल जाते हैं, जो मोर का मुख्य भोजन है।
उन्होंने बताया कि यह एक विचित्र घटना है उन्हें यहां पर रहते हुए करीब 100 साल हो गए हैं लेकिन पहले कभी यहां पर राष्ट्रीय पक्षी मोर देखा गया और नहीं किसी से सुना गया उन्होंने बताया कि इसका मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन है मोर मैदानी इलाकों में पाए जाते हैं
डीएफओ मसूरी अमित कंवर ने कहा कि फील्ड स्टाफ को मोर के नए ठिकानों पर नजर रखने और स्थानीय लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय पक्षी मोर मैदानी क्षेत्रों में ही पाया जाता है पहली बार पहाड़ी क्षेत्र में मोर दिखाई देने की घटना सामने आई है उन्होंने कहा फिलहाल एक ही मोर देखा गया है उक्त जगह पर विभागीय टीम को नजर रखना के लिए निर्देशित किया गया है ताकि पता लगाया जा सके कि मोर अकेला है या पूरा झुंड हैl जलवायु परिवर्तन ही इसका कारण माना जा रहा है वैसे इस बारे में अध्ययन किया जाएगा उसके बाद ही आगे कुछ कहा जा सकता हैl
संपादक: देव उनियाल
