पालिका सभासद गीता कुमाई ने लंढौर भू धंसाव का उपचार करने की मांग को लेकर ज्ञापन दिया
Sarthak Mail April 21, 2026 0पालिका सभासद गीता कुमाई
ने लंढौर भू धंसाव का उपचार करने की मांग को लेकर ज्ञापन दिया

मसूरी l

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Devendra Uniyal
पालिका सभासद गीता कुमाई ने पालिका अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन को ज्ञापन देकर मांग की है कि लंढौर बाजार क्षेत्र में हो रहे भू धंवास एवं सड़क पर पडी दरारों से उत्पन्न गंभीर खतरे से बचाव के लिए त्वरित एवं प्राथमिकता से कार्रवाई की जाय ताकि भविष्य में किसी दुर्घटना से बचा जा सकेl
पालिका सभासद गीता कुमाई ने ज्ञापन में अवगत कराया कि लंढौर बाजार क्षेत्र में सड़क पर दरारें पड़ी है व लंबे समय से भू धंसाव हो रहा है। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक एवं संवेदनशील होती जा रही है। जोशीमठ एवं हिमाचल प्रदेश में आई आपदाओं के उपरांत वर्ष 2023 से लेकर गत वर्ष तक कई बार इस क्षेत्र का सर्वेक्षण एवं तकनीकी अध्ययन भी किया गया था, जिससे इस क्षेत्र की भौगोलिक संवेदनशीलता स्पष्ट रूप से सामने आ चुकी है। वर्तमान में सड़क में आई दरारों के माध्यम से वर्षा का पानी रिसकर दोनों ओर स्थित भवनों की नींव को लगातार प्रभावित कर रहा है। यह स्थिति केवल संरचनात्मक क्षति तक सीमित नहींं है, बल्कि भविष्य में जन- धन की हानि की संभावित आशंका को भी इंगित करती है। स्थानीय निवासियों में भय एवं असुरक्षा की भावना लगातार बढ़ रही है। ऐसी परिस्थितियों में यह अत्यंत आवश्यक है कि पूर्व में तैयार तकनीकी रिपो्टों एवं विशेषज्ञों के सुझावों का संज्ञान लेते हुए, इस विषय में किसी भी प्रकार की देरी न की जाए। समय रहते उचित का्र्यवाही न होने की स्थिति में उत्पन्न होने वाले परिणाम अत्यंत गंभीर हो सकते हैं। ज्ञापन में मांग की गयी कि संबंधित विभागों के समन्वय से, तकनीकी विशेषज्ञों की देखरेख में इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल प्रारंभ कर आगामी वर्षा ऋतु से पूर्व पूर्ण कराया जाए, जिससे संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके।
पालिका सभासद गीता कुमाई ने ज्ञापन में अवगत कराया कि लंढौर बाजार क्षेत्र में सड़क पर दरारें पड़ी है व लंबे समय से भू धंसाव हो रहा है। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक एवं संवेदनशील होती जा रही है। जोशीमठ एवं हिमाचल प्रदेश में आई आपदाओं के उपरांत वर्ष 2023 से लेकर गत वर्ष तक कई बार इस क्षेत्र का सर्वेक्षण एवं तकनीकी अध्ययन भी किया गया था, जिससे इस क्षेत्र की भौगोलिक संवेदनशीलता स्पष्ट रूप से सामने आ चुकी है। वर्तमान में सड़क में आई दरारों के माध्यम से वर्षा का पानी रिसकर दोनों ओर स्थित भवनों की नींव को लगातार प्रभावित कर रहा है। यह स्थिति केवल संरचनात्मक क्षति तक सीमित नहींं है, बल्कि भविष्य में जन- धन की हानि की संभावित आशंका को भी इंगित करती है। स्थानीय निवासियों में भय एवं असुरक्षा की भावना लगातार बढ़ रही है। ऐसी परिस्थितियों में यह अत्यंत आवश्यक है कि पूर्व में तैयार तकनीकी रिपो्टों एवं विशेषज्ञों के सुझावों का संज्ञान लेते हुए, इस विषय में किसी भी प्रकार की देरी न की जाए। समय रहते उचित का्र्यवाही न होने की स्थिति में उत्पन्न होने वाले परिणाम अत्यंत गंभीर हो सकते हैं। ज्ञापन में मांग की गयी कि संबंधित विभागों के समन्वय से, तकनीकी विशेषज्ञों की देखरेख में इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल प्रारंभ कर आगामी वर्षा ऋतु से पूर्व पूर्ण कराया जाए, जिससे संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके।
संपादक: देव उनियाल
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