October 4, 2026

पर्यटन नगरी मसूरी बनी जामनगरी, पर्यटक घंटों जाम में फंसने को मजबूर मसूरी में व्यवस्थाएं ध्वस्त: सड़कों पर गड्ढे, जगह-जगह कूड़े के ढेर, आवारा पशुओं और बंदरों का आतंक

पर्यटन नगरी मसूरी बनी जामनगरी, पर्यटक घंटों जाम में फंसने को मजबूर
मसूरी में व्यवस्थाएं ध्वस्त: सड़कों पर गड्ढे, जगह-जगह कूड़े के ढेर, आवारा पशुओं और बंदरों का आतंक
मसूरी।
Devendra Uniyal
पहाड़ों की रानी मसूरी इन दिनों अपनी खूबसूरती के लिए नहीं बल्कि बदहाली के लिए चर्चा में है। देश-विदेश से मसूरी घूमने आने वाले हजारों पर्यटकों को शहर में प्रवेश करते ही घंटों लंबे जाम का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि मसूरी अब पर्यटन नगरी नहीं बल्कि जामनगरी बनकर रह गई है।
शासन, प्रशासन और नगर पालिका परिषद द्वारा जाम से निजात दिलाने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों में भी भारी रोष है।
जाम से थमी जिंदगी, अस्पताल पहुंचना हुआ मुश्किल
शहर के मुख्य मार्ग लाइब्रेरी चौक, पिक्चर पैलेस, किंक्रेग और देहरादून-मसूरी मार्ग पर सुबह से शाम तक जाम की स्थिति बनी रहती है। जाम के कारण सबसे ज्यादा परेशानी बीमार लोगों और स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है।
स्थानीय निवासी राकेश सिंह और कुलदीप सिंह ने बताया कि जाम के कारण बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचने में घंटों लग रहे हैं, जिससे कई बार मरीजों की जान पर भी बन आती है। एंबुलेंस भी जाम में फंस जाती है। स्कूली बच्चे रोजाना देर से स्कूल पहुंच रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन और नगर पालिका जाम की समस्या को लेकर पूरी तरह मौन है। कोई ट्रैफिक प्लान नहीं, कोई पार्किंग की व्यवस्था नहीं।
सड़कों की दुर्दशा, गड्ढे दे रहे हादसों को न्योता
मसूरी की सड़कों की हालत भी बेहद खस्ता है। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं जो दुर्घटनाओं को खुला निमंत्रण दे रहे हैं। पालिका की अधिकांश आंतरिक सड़कें और संपर्क मार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं। न सड़कों का चौड़ीकरण हो रहा है और न ही मरम्मत।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका द्वारा करोड़ों रुपए नाला-खालों पर खर्च दिखाया जा रहा है, लेकिन जो मुख्य सड़कें और संपर्क मार्ग हैं, उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। हर दिन पर्यटक और स्थानीय लोग इन गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
नो पार्किंग में पार्किंग, पार्किंग की भारी कमी
शहर में पार्किंग की भारी कमी है। जो पार्किंग हैं वो नाकाफी हैं। वहीं नो पार्किंग जोन में दिनभर वाहन खड़े रहते हैं। पुलिस की कमी के चलते यातायात व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो चुकी है। बड़े वाहनों के बेतरतीब प्रवेश से जाम और बढ़ जाता है।
बंदर, लंगूर, कुत्तों और आवारा पशुओं का आतंक
मसूरी में बंदर, लंगूर और आवारा कुत्तों का आतंक भी चरम पर है। माल रोड पर भी आवारा पशु घूमते नजर आते हैं। बंदरों के झुंड पर्यटकों और स्थानीय लोगों पर हमला कर रहे हैं, उनके हाथों से सामान छीन ले रहे हैं। कुत्तों के काटने की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन नगर पालिका द्वारा इनके लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है।
स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव
ऊपर से शहर में स्वास्थ्य सुविधाओं का भी अभाव है।  उप जिला चिकित्सालय भी रेफर केंद्र बनकर रह गया है.
कुल मिलाकर पर्यटन नगरी मसूरी आज बदहाली की मार झेल रही है। यदि समय रहते शासन-प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए तो आने वाले समय में पर्यटक मसूरी से मुंह मोड़ने लगेंगे, जिससे स्थानीय व्यापार और पर्यटन पर भी बुरा असर पड़ेगा।

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