October 11, 2026

गढ़वाल सभा के मंच पर बिखरी पहाड़ की संस्कृति, पहाड़ी गीतों में झूमा पंडाल पहाड़ी वेशभूषा में फैशन शो, पहाड़ी भाषा में मंच संचालन ने लूटी महफिल.  सोभा यात्रा में आया दूसरा स्थान 

गढ़वाल सभा के मंच पर बिखरी पहाड़ की संस्कृति, पहाड़ी गीतों में झूमा पंडाल
पहाड़ी वेशभूषा में फैशन शो, पहाड़ी भाषा में मंच संचालन ने लूटी महफिल.  सोभा यात्रा में आया दूसरा स्थान
मसूरी।
Devendra Uniyal
मसूरी शरदोत्सव में गढ़वाल सभा द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में पूरे पंडाल में पहाड़ की अनोखी झलक देखने को मिली। कार्यक्रम की शुरुआत से अंत तक पहाड़ी कल्चर की छाप रही।
पहाड़ी गीतों की लहरों में पूरा पंडाल डूबा रहा। कलाकारों ने जैसे ही पहाड़ी लोकगीत छेड़े, दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पहाड़ी परिधानों में फैशन शो रहा। युवक-युवतियों ने पारंपरिक पहाड़ी वेशभूषा – पिछौरा, आंगड़ी, घाघरा, टोपी और माला पहनकर रैंप पर पहाड़ की संस्कृति की झलक दिखाई।
इस बार खास बात यह रही कि पूरे कार्यक्रम का मंच संचालन पहली बार पहाड़ी भाषा में किया गया, जिसे दर्शकों और पर्यटकों ने खूब सराहा। मंच से लेकर दर्शक दीर्घा तक पहाड़ी बोली की गूंज सुनाई दी।
यह पहला अवसर था जब मसूरी शरदोत्सव के मंच पर इस तरह से संपूर्ण पहाड़ी कल्चर एक साथ देखने को मिला। पहाड़ी कल्चर पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरी महफिल लूट ली। बाहर से आए पर्यटकों ने भी कहा कि पहाड़ की असली संस्कृति को इतने करीब से देखना सुखद अनुभव रहा।
। कार्यक्रमों का पर्यटकों ने भी खूब आनंद लिया। गढ़वाल सभा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड की लोक संस्कृति और पारंपरिक परिधानों को बढ़ावा दिया गया। इस दौरान पारंपरिक परिधानों पर आधारित फैशन शो आकर्षण का केंद्र रहा।
महिलाओं ने भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर लोक संस्कृति की झलक पेश की। सभा अध्यक्ष सुधा झिल्ल्डियाल व
लक्ष्मी उनियाल ने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ना जरूरी है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को महिलाओं और युवा पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण है l उन्होंने कहा कि सभी महिलाओं के सहयोग से शोभायात्रा में सभा को दूसरा नंबर मिला हैl

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