March 7, 2026

मसूरी में धूमधाम से मनाया गया नाग पंचमी का त्यौहार

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मसूरी में धूमधाम से मनाया गया नाग पंचमी का त्यौहार


मसूरी।
Devendra Uniyal

पर्यटन नगरी मसूरी के कार्टमेंकंजी रोड स्थित भगवान नाग देवता के मंदिर में नाग पंचमी पर मेले का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान नागराज के दर्शन किए दूध, दही, मक्खन व घी आदि का प्रसाद चढाया व परिवार की खुश्हाली की कामना की।
मंगलवार को ग्राम भटटा क्यारकुली क्षेत्र में कार्ट मेकंजी रोड पर भगवान नाग मंदिर में नाग पंचमी का पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। जिसमें दूर-दूर से आकर श्रद्धालुओं ने नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त किया इस मौके पर विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया था जिसमें भक्त जनों ने प्रसाद ग्रहण किया वहीं ढोल दमाऊ की थाप पर नाग देवता अपने भक्तों पर अवतरित हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया। मान्यता है कि नाग देवता मंदिर में मांगी गई मनोकामनाएं पूर्ण होती है। यहां पर मसूरी देहरादून के साथ ही आसपास के ग्रामीण भाग लेते हैं। इस मौके पर भट्टा क्यारकुली नाग देवता मंदिर समिति के सचिव सुधांशु रावत ने बताया कि हर वर्ष नाग पंचमी के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें दूर-दूर से लोग आकर नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस मौके पर नाग देवता मंदिर समिति के संरक्षक करण सिंह कोठाल ने बताया कि इस मंदिर की अपनी विशेष पहचान है बताया जाता है कि पूर्व में यहां पर गाय माता द्वारा नाग देवता को दूध पिलाया जाता था जब ग्रामीणों ने इसे देखा तो उन्होंने यहां पर नाग देवता मंदिर का निर्माण किया और तब से लेकर आज तक यहां पर मेले का आयोजन किया जाता है।
इस मौके पर समिति के अध्यक्ष भीम सिंह रावत, अर्जुन कोटाल, हुकम सिंह रावत, होशियार सिंह थापली, संतोष सिंह थापली, राकेश रावत, आशीष रावत, हिम्मत थापली, अजय जदवाण, धीरज रावत, शमशेर सिंह रावत, दीपांशु ठाकुर, प्रीतम जदवाण सहित सैकड़ो की संख्या में मातृशक्ति, पुरुष, युवा शामिल रहे।

मसूरी का नाग मंदिर, जिसे 500 साल से भी अधिक पुराना माना जाता है, एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है जो नाग देवता को समर्पित है। यह मंदिर मसूरी के क्यारकुली भट्टा गांव में स्थित है और यहां नाग देवता की पूजा की जाती है।

नाग मंदिर का इतिहास

मंदिर से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय भट्टा गांव में एक गाय थी जो रोजाना एक पत्थर पर अपना दूध चढ़ाती थी।

नाग देवता की उत्पत्ति:

जब गांव वालों ने इस रहस्य का पता लगाया, तो उन्होंने देखा कि गाय का दूध एक नाग देवता पी रहे थे।
मंदिर का निर्माण:

गांव वालों ने उस स्थान पर नाग देवता का मंदिर बनवाया, जिसे बाद में नाग मंदिर के नाम से जाना जाने लगा।
500 साल पुराना मंदिर:

यह मंदिर 500 साल से भी अधिक पुराना माना जाता है।
सिद्ध पीठ

इस मंदिर को सिद्ध पीठ के रूप में भी माना जाता है, जहां नाग देवता के दर्शन करने और मन्नतें मांगने के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं।

नाग देवता की पूजा:

यह मंदिर नाग देवता को समर्पित है और यहां नाग देवता की पूजा की जाती है।
धार्मिक स्थल:
यह एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है और यहां नाग पंचमी के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
पर्यटन स्थल:
नाग मंदिर मसूरी का एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है।
स्थानीय लोगों की आस्था:

स्थानीय लोगों के लिए यह मंदिर बहुत महत्वपूर्ण है और वे इसे अपने कुल देवता के रूप में पूजते हैं।

नाग मंदिर में भगवान शिव, पार्वती और गणेश की मूर्तियां भी स्थापित हैं।
मसूरी के इस मंदिर के अलावा, उत्तराखंड में कई अन्य नाग देवता मंदिर भी स्थित हैं।

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संपादक: देव उनियाल

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