तिलक लाइब्रेरी में बाल गंगाधर तिलक . चंद्रशेखर की जयंती मनाई
तिलक लाइब्रेरी में बाल गंगाधर तिलक . चंद्रशेखर की जयंती मनाई
मसूरी। Devendra Uniyal
तिलक लाइब्रेरी में स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक व चंद्रशेखर आजाद की जयंती मनाई गयी इस मौके पर बाल गंगाधर तिलक व चंद्रशेखर आजाद के चित्र पर पुष्पाजंलि अपिर्त कर उनको श्रद्धांजलि दी व मुख्य अतिथि प्रधानाचार्य महात्मा योगेश्वर सरस्वती शिशु मंदिर डा. मनोज रयाल व अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर जयंती पर अपने विचार व्यक्त किये व उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आहवान किया।
तिलक लाइब्रेरी में आयोजित बाल गंगाधर तिलक व चंद्रशेखर आजाद की जयंती के अवसर पर मुख्य अतिथि डा. मनोज रयाल ने कहा कि भारत देश प्राचीन देश है, जिसमें विश्व की सभी संस्कृति व सभ्यता को एक सूत्र में पिरोने का कार्य देश के सपूतों ने किया है। इतिहास बताता है कि यह देश चार युगों से चलता आ रहा है, जिसमें किसी न किसी ने समाज को दिशा देने का कार्य किया है, भगवान राम व कृष्ण इसमें एक थे। इसी कड़ी में बाल गंगाधर तिलक जहां महान स्वतंत्रता सेनानी थे वहीं वह पहले एक शिक्षक थे, उन्होंने कहा कि देश का आंदोलन तभी सफल होगा जब देश शिक्षित होगा, उन्होंने कहा था कि स्वतंत्रता तो सबसे बडी है लेकिन आजादी की प्रेरणा, बलिदान का गुण शिक्षा से आयेगा। विश्व में जितने भी बदलाव हुए है उसमें शिक्षकों की अहम भूमिका रही है। उन्होंने देश की आजादी के लिए विभिन्न, समाचार पत्र निकाले, धर्म को शामिल किया व समाज में परिवर्तन लाने का कार्य किया व देश की आजादी में अहम योगदान दिया। इस मौके पर डा. मनोज रयाल, राकेश अग्रवाल, अधिवक्ता सीआर आर्य, संतोष आर्य, एनके साहनी, पवन कुमार गोयल, बिजेंद्र पुंडीर, काजल टम्टा, रजत राणा, रवि पंवार, नितिन सिंह, आस्था, डा. देवेंद्र कुमार, राखी पंवार, शरद गुप्ता, बिंद्रा गुसांई, ललिता लेखवार आदि मौजूद रहे।
तिलक लाइब्रेरी में आयोजित बाल गंगाधर तिलक व चंद्रशेखर आजाद की जयंती के अवसर पर मुख्य अतिथि डा. मनोज रयाल ने कहा कि भारत देश प्राचीन देश है, जिसमें विश्व की सभी संस्कृति व सभ्यता को एक सूत्र में पिरोने का कार्य देश के सपूतों ने किया है। इतिहास बताता है कि यह देश चार युगों से चलता आ रहा है, जिसमें किसी न किसी ने समाज को दिशा देने का कार्य किया है, भगवान राम व कृष्ण इसमें एक थे। इसी कड़ी में बाल गंगाधर तिलक जहां महान स्वतंत्रता सेनानी थे वहीं वह पहले एक शिक्षक थे, उन्होंने कहा कि देश का आंदोलन तभी सफल होगा जब देश शिक्षित होगा, उन्होंने कहा था कि स्वतंत्रता तो सबसे बडी है लेकिन आजादी की प्रेरणा, बलिदान का गुण शिक्षा से आयेगा। विश्व में जितने भी बदलाव हुए है उसमें शिक्षकों की अहम भूमिका रही है। उन्होंने देश की आजादी के लिए विभिन्न, समाचार पत्र निकाले, धर्म को शामिल किया व समाज में परिवर्तन लाने का कार्य किया व देश की आजादी में अहम योगदान दिया। इस मौके पर डा. मनोज रयाल, राकेश अग्रवाल, अधिवक्ता सीआर आर्य, संतोष आर्य, एनके साहनी, पवन कुमार गोयल, बिजेंद्र पुंडीर, काजल टम्टा, रजत राणा, रवि पंवार, नितिन सिंह, आस्था, डा. देवेंद्र कुमार, राखी पंवार, शरद गुप्ता, बिंद्रा गुसांई, ललिता लेखवार आदि मौजूद रहे।