पर्वतीय बिगुल संस्था जिलाधिकारी सविन बंसल को लोक रत्न हिमालय सम्मान से नवाजेगी
पर्वतीय बिगुल संस्था जिलाधिकारी सविन बंसल को लोक रत्न हिमालय सम्मान से नवाजेगी
Devender uniyal
पर्वतीय बिगुल सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था ने संस्था के 29वें स्थापना दिवस पर 7 जुलाई को असाधारण निर्णयों एव उत्कृष्ट कार्यशैली के लिए देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल को ‘लोकरत्न हिमालय सम्मान’ से सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। किया जाएगा।
पर्वतीय बिगुल सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था के अध्यक्ष एवं फिल्म निर्देशक प्रदीप भण्डारी ने पत्रकार वार्ता में बताया कि देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने कार्यभार ग्रहण करते ही दिन रात सक्रिय रहकर स्वास्थ्य केन्द्रों की कार्यशैली में सुधार करना हो, भिक्षावृत्ती मुक्ति अभियान चलाकर 132 बच्चों को भिक्षावृत्ती से हटाकर उन्हें स्कूल भेजकर नया जीवन प्रदान करना हो, फरियादी बुजर्गों और दिव्यांगों के लिए निःशुल्क ‘सारथी’ वाहन सेवा शूरू करना हो, दशकों से पीड़ित अनेक भूमि मालिकों को उनका हक दिलाना हो, लम्बे समय से उत्पीडित एक विधवा के घर को बैंक के बंधन से 3 दिन में मुक्ति दिलाना हो, आईएसबीटी में जलभराव का समाधान करना हो, सम्मान देकर राज्य निर्माण आन्दोलनकारियों के हक के लिए कार्य करना हो, वृद्व महिला या फ़िर सामान्य नागरिक को अभिवादन के साथ पहले सुनना हो, उनके ऐसे दर्जनों असाधारण निर्णय एव उत्कृष्ट कार्य आज जनता के सम्मुख हैं। भोले भाले पहाड़ी लोगों एवं शांत हिमालयी प्रदेश उत्तराखण्ड को ऐसे ही सरल और कर्तव्यनिष्ठ अधिकरियों की आवश्यकता है। राज्य आन्दोलनकारियों और शहीदों ने भी ऐसे अधिकारियों की कल्पना की थी। इस सम्मान का उद्देश्य उनके द्वारा लोकहित में किए गए उल्लेखनीय कार्यों को सराहा जाना और अन्य लोगों को भी प्रेरित करना है। अधिकारी को सम्मानित करने का यह निर्णय उनके समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है। मालूम हो कि कि संस्था समय समय पर लोकसेवा, संस्कृति एवं समाज सेवा के लिए अनेक विभूतियों को सम्मान प्रदान करती आयी है। संस्था अब तक अंग्रेजी के प्रसिद्व उपन्यासकार रस्किन बॉड, लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी, जागर सम्राट प्रीतम भरतवान, साहित्यकार हरिदत्त भट्ट “शैलेश“ तथा इको फॉरेस्ट प्रोटेक्शन के कर्नल समेत अनेकों विभूतियों को सम्मानित कर चुकी है। इस अवसर पर संस्था महासचिव मोहसिन अहमद, लोक गायिका मीना आर्य तथा कमलेश भण्डारी भी मौजद रहे।
संपादक: देव उनियाल
